थ्रोबैक स्टोरी: सिनेमा की दुनिया में गुरु दत्त एक ऐसा नाम है, जिसे इतिहास सालों तक याद रखेगा। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने सिनेमा को बहुत कुछ दिया, लेकिन अपनी निजी जिंदगी में इस कदर उलझ गए कि उन्होंने मौत को गले लगा लिया। गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ का मशहूर गाना ‘जाने वो कैसे लोग था जिनसे प्यार को प्यार मिला…’ को सुनकर आज ऐसा लगता है मानो ये पंक्तियां उनके जीवन पर ही लिखी गई होंगी. 1953 में गुरुदत्त और गीता दत्त के साथ शादी के बंधन में बंधने के बाद साल 1957 में दूरियां आने लगीं, क्योंकि अब वहीदा रहमान के लिए गुरुदत्त का दिल धड़कने लगा था।

वहीदा के प्यार में पागल थे गुरुदत्त
गुरुदत्त उन दिनों और कुछ नहीं देख सकते थे। वहीदा को रहमान से पूरी तरह प्यार हो गया था। इस वजह से उनके पारिवारिक जीवन में दरार आ गई थी। इसको लेकर पत्नी गीता काफी परेशान हो रही थी।

गीता ने गुस्से में कहा, ‘जब से वो हमारी जिंदगी में आई है…’
गुरुदत्त के जीवन पर लिखी गई किताब ‘गुरुदत्त द अनसेट्सफाइड स्टोरी’ के लेखक यासिर उस्मान के मुताबिक एक बार गीता दत्त ने वहीदा पर अपना गुस्सा उतारा और कहा, ‘जब से वह हमारे जीवन में आई है, जिंदगी नर्क बन गई है। .

गुरुदत्त से हुई थी पत्नी अलग
सिनेमा की दुनिया में किस्से इस कदर उड़े कि गुरुदत्त ने वहीदा के लिए धर्म बदल कर शादी कर ली. पति के अफेयर की खबर सुनकर गीता अपने बच्चों के साथ गुरुदत्त से अलग रहने लगी, पत्नी के जाने के बाद उसने शराब, सिगरेट और नींद की गोलियों को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया।

घर टूटता देख वहीदा ने भी गुरुदत्त से दूरी बना ली थी।
वहीं दूसरी ओर वहीदा ने भी तोड़फोड़ देख गुरुदत्त के घर से दूरी बना ली थी। अपने बच्चों से मिलने की लालसा और अकेलापन गुरु को भीतर से खोखला कर रहा था, क्योंकि वह उनसे मिलने के लिए कुछ नहीं कर पा रहे थे।

बेटी से मिलने को बेताब थे गुरुदत्त
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 9 अक्टूबर को जब उनके दोस्त अबरार अल्वी उनसे मिलने गए तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे. इसी बीच उनका गीता दत्त से फोन पर झगड़ा हो गया। वह अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाहता था और गीता उसे उसके पास भेजने को तैयार नहीं थी। गुरुदत्त ने उन्हें नशे की हालत में एक अल्टीमेटम दिया, ‘बेटी भेजो नहीं तो तुम मेरी लाश देखोगे।’ रात के एक बजे दोनों ने खाना खाया और फिर अबरार अपने घर चला गया। अगले दिन दोपहर में उन्हें फोन आया कि गुरुदत्त बीमार हैं।

गुरुदत्त अक्सर मरने के तरीके की बात करते थे
जब वे अपने घर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गुरुदत्त कुर्ता-पायजामा पहनकर बिस्तर पर लेटे हुए थे। पलंग के बगल वाली मेज पर एक गिलास रखा हुआ था, जिसमें थोड़ा सा गुलाबी द्रव्य अभी बाकी था। अबरार के मुंह से निकलकर गुरुदत्त ने खुदकुशी कर ली है। लोगों ने पूछा तुम्हें कैसे पता? अबरार जानता था, क्योंकि वह और गुरु दत्त अक्सर मरने के तरीकों के बारे में बात करते थे।

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