नई दिल्ली। बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों से स्टार्स एंटी-हीरो बनकर दर्शकों की वाहवाही लूट रहे हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब कोई हीरो अपनी इमेज से हटकर काम करने की सोचता तक नहीं था. सदाबहार अभिनेता अशोक कुमार ने पहली बार नायक की पारंपरिक शैली को तोड़ा और फिल्म ‘किस्मत’ में नायक विरोधी की भूमिका निभाई। यह फिल्म साल 1943 में रिलीज हुई थी, जिसे बॉम्बे टॉकीज ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म में अशोक कुमार की एक्टिंग की काफी तारीफ हुई थी।

13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत न्यू थिएटर में प्रयोगशाला सहायक के रूप में की थी। उस समय उनके साले शशधर मुखर्जी बॉम्बे टॉकीज में कार्यरत थे। मुखर्जी ने अशोक कुमार को अपने पास बुलाया। आपको बता दें कि दोनों इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एक साथ पढ़ते थे, जहां दोनों की गहरी दोस्ती हो गई। तब अशोक कुमार ने अपनी इकलौती बहन की शादी मुखर्जी से कर दी।

बॉम्बे टॉकीज पहुंचने के बाद अशोक कुमार की किस्मत ने करवट ली। बात 1936 की है। उस वक्त बॉम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय फिल्म ‘जीवन नैया’ बना रहे थे। शूटिंग अभी शुरू ही हुई थी कि फिल्म का हीरो गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। तभी हिमांशु राय की नजर अशोक कुमार पर पड़ी। उन्होंने अशोक से ‘जीवन नैया’ का हीरो बनने का अनुरोध किया। इसके बाद कुमार की एक्टिंग कार शुरू हुई।

बॉलीवुड में ‘दादा मुनि’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार ने अपने समय की तमाम बड़ी हीरोइनों के साथ काम किया। 1939 में वह अभिनेत्री लीला चिटनिस के साथ ‘कंगन’, ‘बंधन’ और ‘झुला’ जैसी फिल्मों में नजर आए। सभी फिल्में हिट रहीं। 1943 में हिमांशु राय की मृत्यु हो गई। अशोक कुमार ने बॉम्बे टॉकीज छोड़ दिया और फिल्मिस्तान स्टूडियो चले गए। उन्होंने अभिनेत्री देविका रानी के साथ ‘मशाल’, ‘जिद्दी’ और ‘मजबूर’ जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया। बाद में पचास के दशक में उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस खोला। अपने प्रोडक्शन बैनर तले ‘समाज’ और ‘परिणीता’ फिल्मों का निर्माण किया। लेकिन दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रहीं। फिर उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी बंद कर दी।

कहा जाता है कि फिल्म ‘परिणीता’ के दौरान उनका डायरेक्टर बिमल राय से अनबन हो गई थी। उसके बाद अशोक कुमार ने उनके साथ काम नहीं करने का फैसला किया। फिर एक्ट्रेस नूतन के कहने पर उन्होंने बिमल दा के साथ काम करने के लिए हामी भरी। अशोक कुमार और बिमल राय ने 1963 में आई फिल्म ‘बंदिनी’ में साथ काम किया था। बॉलीवुड के इतिहास में ‘बंदानी’ को कल्ट फिल्म माना जाता है।

अपने छह दशक के करियर में अशोक कुमार ने हर तरह की फिल्में कीं। उन्हें फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ में अपने सभी भाइयों के साथ देखा गया था। इस फिल्म में उनकी कॉमेडी टाइमिंग देखते ही बनती है। उन्होंने देव आनंद की फिल्म ‘ज्वेल्थीफ’ में पहली बार विलेन का रोल प्ले किया था। जब टीवी का जमाना आया तो अशोक कुमार भी यहां थे। उन्होंने ‘हम लोग’, ‘भीम भवानी’, ‘बहादुर शाह जफर’ और ‘उजाले की ओर’ जैसे सीरियल्स में काम किया।

अशोक कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म पुरस्कार भी मिला। उन्हें फिल्म आशीर्वाद के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया था। वर्ष 1988 में, भारत सरकार ने उन्हें फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिए ‘दादा साहब पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया। अशोक कुमार को उनके बेमिसाल अभिनय के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

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